Saturday, 17 January 2009

विचार...........


अपने विचारो पर ध्यान दे ...........

वे आपके शब्द बन जाते हें,

अपने शब्दों पर ध्यान दे............

वे आपकी क्रियाये बन जाती हें ,

अपनी क्रियायों पर ध्यान दे .........

वे आपकी आदत बन जाती हें,

अपनी आदतों पर ध्यान दे ............

वे आपका चरित्र बन जाता हें ,

और आपका चरित्र आपका भाग्य बन जाता हें.........


Monday, 12 January 2009

मंगलमय मकर सक्रांति ,लोहरी , और पोंगल...............







मंगलमय मकर सक्रांति ,लोहरी , और पोंगल...............आप सभी के लिय बहुत सी खुशियों की सोगात लेकर आए ये प्यारे वह अनोखे त्यौहार इसी मंगलकामना के साथ आपको बहुत सारी बधाई ।



मकर सक्रांति के दिन सूर्य देवता दक्षिणायन से उतरायण में प्रवेश करते हें । इस दिन दान पुण्य का बहुत महत्व हें । इस दिन गुड वह तिल के दान का ज्यादा महत्व हें । वह भी गरीबो , और अनाथ को।



इस दिन सभी बहुत दान करते हें लकिन में आपको बताना चाहूंगी की एक दिन दान पुण्य से हमारे सारे पाप धुल जायंगे तो वो ग़लत सोच हें।



मै आपसे यही कहना चाहूंगी की इस दिन दान पुण्य जरुर करे लेकिन सबसे बड़ा दान वो हें की हम बिना फल की इच्छा से दान दे।



इस दिन तो हमें बहुत सा पुण्य मिलेगा यही सोच कर हम दान देते हें



लेकिन जब एक बच्चा भूखा हो , वह सर्दी से कांप रहा हो। उसे हमारी उस वक्त ज्यादा जरुरत होती हें ।



लेकिन हम इंसान ase हे , की यह सब देखकर भी अनदेखा कर देते हें ।



क्यों की सादे दिन दान पुण्य का कोई महत्व हमें नजर नही आता हें।



इसलिए मै कहना चाहूंगी की उस वक्त जब उन्हें हमारी बेहद जरूरत होती हें हमें उस वक्त बिना फल की isccha से दान देना चाहिए ।



एक दिन नही बल्कि, हर दिन उन गरीब , अनाथ बच्चो के नाम



यही सोच मेरी , आपकी , हम सबकी हो ,...................... बस फ़िर क्या सब तरफ खुशियों की



लहरे होगी ..............और खुशाली मेरे , आपके , हम सब के पास होगी।



जो मुस्कान आज मेरे, आपके , हम सब के चहरे पर हे ।



vahi उन चेहरों पर bhi मुस्कान होगी ..............एक मीठी सी .................










Sunday, 11 January 2009

आज का लेख स्वामी विवेकानंद जी के नाम .........


सबसे पहले तो उन्हें उनके जन्मदिन की बधाई देना चाहूंगी ।

आपका जन्म १२ जनवरी १८६३ में हुआ ।

आपके लिए ये पंक्तिया -

आप एक आध्यात्मिकता की मूरत हे

आपको हम शत शत बार नमन करते हे

आप की कही हुई बातें हम हमेशा याद रखंगे

आपने हर प्राणी में इश्वर के अंश देखा ।

शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में आपके व्यक्तित्व से विश्व मुग्ध हो उठा।
जहाँ एक ओर सर्व धर्म समभाव के प्रतीक थे वाही , आप में , अपने हिन्दू होने का गर्व भी था।

आप ने आज के नोजवानो को बहुत अच्छा संदेश दिया । धर्म का असली सार सक्तिसाली बनने में हे । जो कोई भी विचार तुम्हें शारीरिक, मानसिक और नेतिकरूप से कमजोर बनाये उन्हें त्याग दे ।

Saturday, 10 January 2009

फूल , तितली और ये सुनहरी धूप ..........


इस सुहानी धूप में.................
आज तितली अलग ही नजर आ रही ,
मन मनो कह रहा हें ...........
आज मै इस गगन में झूम - झूम नाचू ,
इधर जाउ उधर जाऊ ............
इस फूल जाऊ उस फूल जाऊ ,
aaj इस प्रकृति की गोद में आकर बैठ जाऊ ,
और सबको अपना गीत सुनाऊ..........
और ये फूल इतना सुंदर हें मानो.............
इश्वर ने इसे बड़ी फुर्सत से बनाया हो............
जिसमे चार चाँद और लग जाते जब.............
जब इस सुनहरी धूप में , मै इन फूलो पर बैठ जाती हू...........
और अपनी बाहों को फेलाकर जब नाचती हू.........
और इस फूल की सुगंध लेकर इस ............
जहा मै मदहोश हो जाऊ...............

Friday, 9 January 2009

झील में रवि...............


झील में रवि का निकलना...............

मानो जन्नत का , धरती पर आ जाना ,

और अपनी लालिमा को इस तरह बिखेरना की .........

जैसे ..........

बच्चा अपनी माँ की गोद में बेठा हें ..........

और जिसे किसी का डर नही .........

जैसे .........

सागर में लहरे इस तरह हिचकोले खा रही हें ...........

की आज सारा सागर हमारा हें,

आज रवि भी अपनी पूरी छटाओं के संग निकला हें ,

धरती पर चारो और अपनी लालिमा बिखेरता हुआ,

और ऐसा लगता हें मानो,

झील के संग.......... रवि की लालिमा ..........

आज पूरे अधूरे सपनो को साकार कर देगा ,

और इस धरती पर एक बार फ़िर ईश्वर जन्म लेगा ..............

और .............

रवि अपनी लालिमा से ...........एक बार फ़िर ,

इस धरती पर , जन्नत का नूर बरसायेगा .........
जैसे झील में रवि का निकलना .........................



Thursday, 8 January 2009

ढूंढे तुझे ............

ढूंढे तुझे ............

कही तो होगा वो ,

जिसे बनाया , मेरे लिए,

इस खुदा ने .........

कब आयगा वो ........

और ले जाएगा मुझे दुल्हन बनाकर,

जिसके सपने में देखती हू रात दिन,

उस दिन का मुझे इंतजार हें...........

वो आए और ले जाए मुझे ,

अपने सपनो की दुनिया में ,

बस मेरी ये नजरे........

ढूंढे तुझे................

सिर्फ़ तुझे .............



Wednesday, 7 January 2009

बाबुल तेरा अंगना ............. छूटे ना ..............

बाबुल तेरा अंगना........... छूटे ना............


मत भेजो ना सासरिया ,


अभी तो मुझे रहना हें इस अंगना ,


जिस अंगना , बचपन में झूला ,झुला .........


सहलिया के संग नाचना , गाना , वो हँसी , वो गपशप,


भाई के साथ कितनी ही शर्ते लगा - उसे हराना ,


उसकी चुगली करना..............और आप से डाट लगाना,


वो अंगना अब पराया हो जायगा ............और आप भी माँ


ना मिलेगा वहा माँ के हाथ का खाना ,


ना ही मिलेगा वहा पापा का प्यार ,


भी से मत करो मुझे पराया .............


मत भेजो ना सासरिया...............


पापा काहे की जल्दी हें आपको ,


अभी तो मुझे और पढ़ना हें ,


में भी आपका नाम रोशन करुँगी ,


बाबुल मत करो अभी से पराया ...........


बाबुल तेरा अंगना ............. छूटे ना ..............


नही करो .......... नही करो ना ............ माँ

बाबुल का घर छोड, जाना हें पिया के घर...........

बाबुल का घर छोड, जाना हें पिया के घर...........


मेरे सपनो का घर ,


जिस घर में रहना हें, सारी उमर,


जहा नए- रिश्ते ,नाते बनते ,


जहा हर कोई लगे नया ,अपना सा कोई,



जिनके साथ हें रहना , वो लगे सारे अब अपने,

जिस घर में बचपन से रहे , अब वो घर लगे बेगाना सा,


बाबुल का घर छोड, जाना हें पिया के घर...........


अब नये सिरे से जिन्दगी बितानी हें,


जहा सब हें लेकिन लगता अब भी सुना हें ,


माँ तेरे हाथो का खाना , पापा प्यार भरी थपकी........


याद आते हें वो दिन ,


लेकिन बाबुल , अब तेरा घर आंगन छोड़ .............

मुझे नई दुनिया बसानी हें ,


जहा हर कोई लगे नया ,अपना सा कोई................


बाबुल का घर छोड, जाना हें पिया के घर...........

Tuesday, 6 January 2009

पापा की परी...........माँ की लाडो.............

मै भगवान् की सुकरगुजार हू , की उन्होंने इतने प्यारे माँ पापा की बेटी बनाकर भेजा हे इस प्यारी सी दुनिया मे तीन भाई की लाडली बहन हरदम उचल्कुद करने वाली। और भाई की माँ पापा से डाट पिटवाने वाली एक नटखट सी। याद आता हे वो दिन जब पहली बार साइकिल चलाते हुए घिर गई और इतनी सी चोट मे पापा ने भाई को जोर से डाट लगायी । तुम तो बड़े हो इसे साइकिल क्यों चलने दी अभी तो यह इतनी छोटी हे। मे आज भी पापा के लिए कभी बड़ी नही हुई । आज भी थोड़ा सा कुछ होते ही पापा घबरा जाते हे। वो बचपन के दिन, दिन भर मस्ती करते चाये धुप हो या बारिश , सर्दी के ठिठुरन भरे दिन हो..................... हर दम वही मस्ती , वही नाचना , गाना सहलिया के साथ गपशप लगानी । दिन ऐसा निकल जाता कुछ पता नही चलता। और सर्दी के ठिठुरन भरे दिनों मे माँ अलाव लगा देती तो बस.................. वही बेठ जाते। फ़िर क्या माँ के हाथो का घरम खाना ...........और पापा का अपने हाथो से खिलाना । कहना खाते खाते भाई की चुगली पापा से करना और फ़िर भाई को डाट पड़ती तो उसके मजे लेना । क्या दिन थे वो भी..............

हर दिन मे कुछ बात थी और , और हर बात मे कुछ खास अंदाज था ..............

हर दिन की सुबह भाई की चुगली से होती और पापा उसे दाटते तो उसके मजे लेना । और माँ की लाडली बेटी तो हू ही तो बस ...............यह बचपन के दिन............लेकिन अब बस इन दिनों की यादे हें।

अब तो इतने व्यस्त हो गए हें की, जिन्दगी के नए रस्ते खोजने मे ।

माँ पापा की चाव मे ये बचपन कैसे निकल गया पता ही नही चला लेकिन अभी तो तो bhut चलना हें। और वैस भी जिन्दगी रुकने का नाम नही ...........................

चलते रहो अभी आपको बहुत उचे मुकाम पर जाना हें , बस माँ पापा का आशीर्वाद सदा मेरे साथ रहे ................

Monday, 5 January 2009

दिल की बात.............

आज हम आपसे दिल की बात करते हें। दिल ऐसाकी सब के पास होता हें लेकिन वह धड़कता भी हें लेकिन दिल की अपने आप की बात सुन आन्ही पात हेंअब हम आपको क्या बताये ये दिल की बात ..................

अभी तो हम आपको बताना सुरु भी नही हुए और आप अपने दिल की बातो मे होने लग गए।

अरे अभी रुको तो सही............. कहा खो रहे हो............. अभी हमारी बातो पर जरा घोर फरमाए

दिल एक नाजुक बंधन हेंजिससे हम सभी जुड़े हें और हमारे कई रिश्ते जुड़े हेंहम माँ भी हें तो बेटी भी हें और एक बहू भी हेंयह सारे रिश्ते एक moti की ladhi के समान जुड़े हुए हें।

यह hamare लिए बहूत aमूल्य हें। इसे हमें जिंदगी भर सहज कर रखना हेंइन रिश्तो से हमें हमारे होने का एहसास होता हेंहमें जीवन के वह खुबसूरत पल देता हें जिसे हम जिन्दगी नही भूल पाते हेंयही रिश्ते हमें हमारी मंजिल की और लेकर जाते और आगे बढ़ने में हमारी मदद करते हें और इसी का नाम जिन्दगी हें। सभी के दिल में हमेशा एक ख्वाब रहता हें जिसे सभी अपने सपने सच करने में लगे रहते हें लेकिन सब यह भूल जाते हें की जिसे हम सपना मज रहे हें वह हकीकत हें। aur इसी उधेड़बुन में जिन्दगी चलती रहती हें और हम ............... कही खो जाते हें।

अरे भाई कहा खो गए आप .................

धन्यवाद

Sunday, 4 January 2009

उमंग.............

umang jisese hamara gahra rishta he
हम जानते हें की हर आदमी सिर्फ़ पैसे के पीछे भाग रहा हें।
लेकिन उसे सुकून नही मिल रहा हें चाहे कितना ही पैसा कमा ले लेकिन फ़िर भी उसे कम लगता हें ।
एसा इस लिए की उसे सिर्फ़ पैसा कमाना की उमंग हें जीने की नही।
लेकिन उमंग जीने की हो।